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बिज़नेस लोन EMI कैलकुलेटर

अपनी मासिक किस्त (EMI), कुल ब्याज और पूरा repayment schedule अभी और यहीं निकालें — बिना किसी झंझट के, बिल्कुल फ्री।

✅ MSME / मुद्रा लोन ✅ टर्म लोन ✅ वर्किंग कैपिटल ✅ स्टार्टअप लोन
लोन का प्रकार चुनें
₹1 लाख₹5 करोड़
7%36%
6 माह240 माह
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मासिक EMI
₹0
टर्म लोन · 36 माह
कुल ब्याज
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ब्याज में जाने वाली रकम
कुल भुगतान
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मूलधन + ब्याज
0%ब्याज
मूलधन₹0
ब्याज₹0
प्रोसेसिंग फीस₹0
*प्रोसेसिंग फीस एक बार कटती है, लोन मिलते समय
पहले 12 महीने + बाकी का सारांश
महीनाEMI (₹)मूलधन (₹)ब्याज (₹)शेष बकाया (₹)

बिज़नेस लोन EMI कैलकुलेटर क्या होता है?

देखिए, जब भी कोई दुकानदार, छोटा व्यापारी या MSME मालिक बैंक से लोन लेने की सोचता है, तो सबसे पहला सवाल यही आता है — "हर महीने कितनी किस्त भरनी पड़ेगी?" बस यही काम करता है हमारा बिज़नेस लोन EMI कैलकुलेटर

यह एक फ्री और तुरंत काम करने वाला ऑनलाइन टूल है जो आपकी मासिक किस्त यानी EMI (Equated Monthly Instalment) सेकंडों में निकाल देता है। इसके साथ-साथ यह बताता है कि पूरे लोन अवधि में आप कितना ब्याज चुकाएंगे और कुल कितनी रकम वापस करनी होगी। प्रोसेसिंग फीस भी इसमें जोड़ी गई है, जिसे अक्सर लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं — लेकिन यह आपकी जेब पर असर डालती है।

यह कैलकुलेटर वही घटते हुए बकाया (Reducing Balance) फार्मूले का उपयोग करता है जो RBI के सभी बैंक और NBFC अपने लोन की EMI निकालने के लिए इस्तेमाल करते हैं — चाहे SBI हो, HDFC हो, ICICI हो या कोई भी।

EMI = P × r × (1 + r)ⁿ  ÷  [(1 + r)ⁿ − 1] P = मूलधन (लोन राशि)  ·  r = मासिक ब्याज दर (वार्षिक दर ÷ 12 ÷ 100)  ·  n = कुल महीने (अवधि)

यह वही फार्मूला है जो देश के हर सरकारी और प्राइवेट बैंक में इस्तेमाल होता है। तो जो नतीजा आपको यहाँ मिलेगा, वो बैंक के असली आंकड़ों के बराबर ही होगा।

हर बिज़नेस मालिक को यह टूल क्यों चाहिए?

लोन लेना एक बड़ा फैसला है। अगर EMI आपके मासिक कैश फ्लो से ज़्यादा हो गई, तो धंधा मुश्किल में पड़ सकता है — भले ही बिज़नेस चल रहा हो। यह कैलकुलेटर आपको समझदारी से कर्ज़ उठाने में मदद करता है:

  • बजट बनाएं पहले से: हर महीने कितना पैसा जाएगा, यह पहले से जानें — लोन साइन करने से पहले।
  • बैंकों की तुलना करें: एक ही रकम को अलग-अलग ब्याज दरों पर डालकर देखें — कौन सस्ता है।
  • बातचीत करें जानकारी के साथ: बैंक मैनेजर के सामने अपने नंबर लेकर जाएं, तो वो आपको बेहतर डील दे सकते हैं।
  • ज़रूरत से ज़्यादा न लें: यह टूल बताता है कि अवधि बढ़ाने से EMI घटती है — लेकिन कुल ब्याज बढ़ जाता है।
  • टैक्स बचत का हिसाब: बिज़नेस लोन पर चुकाया ब्याज Income Tax Act 1961 की धारा 36(1)(iii) के तहत पूरी तरह tax-deductible है। EMI schedule से सालाना ब्याज अलग निकालकर ITR में दर्ज करें।

भारत में बिज़नेस लोन के प्रकार

भारत में अलग-अलग ज़रूरतों के लिए अलग-अलग तरह के बिज़नेस लोन उपलब्ध हैं। सही प्रकार का लोन चुनना ज़रूरी है — इससे आपको सही बैंक से, सही कागज़ात के साथ जल्दी मंज़ूरी मिलती है।

🏭 टर्म लोन

एकमुश्त रकम जो तय किस्तों में 1 से 7 साल में चुकाई जाती है। मशीनरी, उपकरण, वाहन या प्रॉपर्टी के लिए सबसे उपयुक्त।

💸 वर्किंग कैपिटल लोन

रोज़मर्रा के खर्चे — कच्चा माल, स्टॉक, तनख्वाह — इन सबके लिए छोटी अवधि (12 महीने तक) का क्रेडिट।

🌱 MSME / मुद्रा लोन

PMMY के तहत सरकारी गारंटी वाले लोन। तीन श्रेणियाँ: शिशु (₹50K तक), किशोर (₹5L तक), तरुण (₹10L तक)।

🚀 स्टार्टअप लोन

बिना गारंटी के नए बिज़नेस के लिए लोन। SIDBI और Stand-Up India योजना के ज़रिए ₹1 करोड़ तक मिल सकते हैं।

🔒 प्रॉपर्टी पर लोन (LAP)

मकान या दुकान को गिरवी रखकर बड़ी रकम का लोन। ब्याज दर कम, अवधि लंबी — 15 से 20 साल तक।

📦 इनवॉइस / बिल डिस्काउंटिंग

बकाया बिलों पर तुरंत नकदी। B2B कारोबारियों के लिए जो देर से भुगतान पाते हैं — कोई EMI नहीं, जब ग्राहक पे करे तब चुकाएं।

भारत में बिज़नेस लोन की ब्याज दरें कितनी हैं?

अभी के समय भारत में बिज़नेस लोन की ब्याज दरें 9% से 36% सालाना के बीच हैं। यह निर्भर करता है आपके CIBIL स्कोर, बिज़नेस कितने साल पुराना है, सालाना टर्नओवर, और लोन सुरक्षित है या नहीं। सरकारी बैंक 9%–14%, प्राइवेट बैंक 12%–20%, जबकि NBFC और फिनटेक कंपनियां 18%–36% तक वसूल सकती हैं — हालांकि उनसे लोन जल्दी मिलता है।

अधिकांश बैंक अपनी दरें RBI की MCLR या Repo-Linked Lending Rate (RLLR) से जोड़ते हैं। जब RBI रेपो रेट बदलता है, आपकी floating rate लोन की EMI भी बदल सकती है। इस कैलकुलेटर पर अलग-अलग दरें डालकर दोनों स्थितियाँ मॉडल करके देखें।

इस कैलकुलेटर का इस्तेमाल कैसे करें — आसान गाइड

यह कैलकुलेटर मोबाइल पर भी आराम से चलता है। बस ये छह कदम उठाइए और अपना हिसाब तुरंत पाइए:

1

लोन प्रकार चुनें: टर्म लोन, वर्किंग कैपिटल, MSME/मुद्रा या स्टार्टअप लोन — जो आपकी ज़रूरत हो।

2

लोन राशि डालें: स्लाइडर घुमाएं या सीधे टाइप करें। ₹1 लाख से ₹5 करोड़ तक की रेंज है।

3

ब्याज दर सेट करें: बैंक ने जो दर बताई है वो डालें। नहीं जानते? सरकारी बैंक के लिए 12%, NBFC के लिए 18-24% डालकर देखें।

4

अवधि चुनें: महीनों में। कम अवधि = ज़्यादा EMI, कम ब्याज। ज़्यादा अवधि = कम EMI, ज़्यादा ब्याज।

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प्रोसेसिंग फीस जोड़ें: अधिकतर बैंक 0.5% से 3% चार्ज करते हैं। इसे डालने पर असली लागत पता चलती है।

6

नतीजे पढ़ें: EMI, कुल ब्याज, कुल भुगतान — सब तुरंत। पाई चार्ट और किस्त विवरण तालिका भी देखें।

किस्त विवरण तालिका (Amortization Schedule) कैसे समझें?

"पूरा किस्त विवरण देखें" पर क्लिक करें और देखें कि हर महीने आपकी EMI का कितना हिस्सा ब्याज में जा रहा है और कितना मूलधन चुका रहा है। शुरुआत में ब्याज ज़्यादा होता है, धीरे-धीरे जैसे-जैसे बकाया कम होता है, ब्याज घटता है और मूलधन ज़्यादा चुकता है — इसे ही Reducing Balance कहते हैं।

यह तालिका खासतौर पर इन कामों में आती है:

  • जब कभी अतिरिक्त पैसे हों तो prepayment की योजना बनाना — ताकि ब्याज बचे।
  • किसी भी महीने में आपका बकाया बैलेंस जानना — अगर लोन ट्रांसफर करना हो।
  • सालाना ब्याज का हिसाब निकालना जो ITR में धारा 36(1)(iii) के तहत घटाया जा सकता है।
  • यह जानना कि आप कब लोन-फ्री होंगे।

बेहतरीन बिज़नेस लोन पाने के लिए ज़रूरी सुझाव

कम EMI का मतलब हमेशा अच्छा लोन नहीं होता। असली बात यह है कि पूरी अवधि में आप कुल कितना चुकाते हैं। नीचे दिए सुझाव उन लोगों के लिए हैं जो समझदारी से लोन लेना चाहते हैं:

CIBIL स्कोर मज़बूत रखें — निजी और कंपनी दोनों का

बिज़नेस लोन में बैंक दो चीज़ें देखता है — कंपनी का CIBIL CMR Rank और मालिक/प्रमोटर का निजी CIBIL स्कोर। अगर आपका पर्सनल स्कोर 750 से ऊपर है, तो आपको कम ब्याज दर पर जल्दी मंज़ूरी मिलती है। लोन अप्लाई करने से कम से कम 6 महीने पहले कोई किस्त या क्रेडिट कार्ड लेट न जाए — इसका ख़ास ध्यान रखें।

साफ-सुथरे वित्तीय दस्तावेज़ दिखाएं

बैंक आमतौर पर 2-3 साल पुराना बिज़नेस और लगातार आय देखना चाहते हैं। पिछले 2 साल का ITR, GST रिटर्न, ऑडिटेड बैलेंस शीट, P&L अकाउंट और 12 महीने का बैंक स्टेटमेंट तैयार रखें। जिन बिज़नेस का सालाना टर्नओवर ₹1 करोड़ से ऊपर है और हर साल बढ़ रहा है, उन्हें बहुत अच्छी शर्तों पर लोन मिलता है।

एक साथ कई बैंकों में आवेदन न करें

एक साथ कई जगह apply करने से हर बैंक आपका CIBIL चेक करता है — जिसे Hard Enquiry कहते हैं। हर enquiry से CIBIL स्कोर 5-10 पॉइंट घट सकता है। पहले इस कैलकुलेटर से अलग-अलग दरों की तुलना करें, सबसे सस्ते और उपयुक्त बैंक को चुनें — फिर एक जगह, अच्छी तैयारी के साथ आवेदन करें।

गिरवी रखकर (Secured) लोन लें तो ब्याज कम होगा

अगर आपके पास दुकान, मकान, मशीनरी या कोई संपत्ति है, तो उसे गिरवी रखकर लोन लेने पर 2% से 5% कम ब्याज मिल सकती है। 5 साल के टर्म लोन पर यह फर्क लाखों रुपये की बचत में बदल जाता है — इस कैलकुलेटर पर दोनों दरें डालकर ख़ुद देखें।

प्रोसेसिंग फीस और Prepayment की शर्तें ज़रूर पूछें

प्रोसेसिंग फीस अक्सर बातचीत करने पर कम करवाई जा सकती है — खासकर बड़े लोन पर। साथ ही यह भी पूछें कि क्या बीच में लोन बंद करने पर penalty लगेगी। जो बैंक 12 महीने बाद बिना penalty के prepayment की अनुमति देते हैं, वहाँ अच्छे महीनों में थोड़ा extra जमा करके ब्याज में बड़ी बचत की जा सकती है।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस कैलकुलेटर के नतीजे केवल अनुमानित हैं और घटते बकाया (Reducing Balance) फार्मूले पर आधारित हैं। असली EMI, ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और कुल भुगतान आपके बैंक, CIBIL प्रोफाइल और RBI की नीतियों के अनुसार अलग हो सकते हैं। LoanCalculate.in एक स्वतंत्र जानकारी प्रदान करने वाला प्लेटफ़ॉर्म है — यह बैंक, NBFC या वित्तीय सलाहकार नहीं है। लोन साइन करने से पहले हमेशा अपने बैंक से पुष्टि करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

अधिकांश बैंक और NBFC बिज़नेस लोन के लिए 700 या उससे ऊपर का CIBIL स्कोर चाहते हैं। अगर आपका स्कोर 750 से ज़्यादा है, तो आपको सबसे कम ब्याज दर और सबसे तेज़ मंज़ूरी मिलेगी। कुछ फिनटेक कंपनियां 650 से 700 के बीच स्कोर पर भी लोन देती हैं — लेकिन ब्याज ज़्यादा होगा और शर्तें सख्त।
यह कैलकुलेटर Reducing Balance (घटते बकाया) फार्मूले पर काम करता है — यही तरीका RBI के सभी बैंक और NBFC इस्तेमाल करते हैं। इसमें ब्याज सिर्फ बकाया मूलधन पर लगता है, पूरी मूल रकम पर नहीं। यह Flat Rate से सस्ता और फायदेमंद होता है।
हाँ, ज़्यादातर बैंक Partial Prepayment या Full Foreclosure की अनुमति देते हैं। जितना जल्दी मूलधन चुकाएंगे, उतना ब्याज बचेगा। लेकिन कुछ बैंक बकाया रकम का 2%–5% penalty लेते हैं। Floating rate लोन पर RBI के नियमों के तहत penalty नहीं लगनी चाहिए — लेकिन अपना loan agreement ज़रूर पढ़ें।
जी हाँ। बिज़नेस लोन पर चुकाया गया ब्याज पूरी तरह tax-deductible है — Income Tax Act, 1961 की धारा 36(1)(iii) के अंतर्गत। लेकिन मूलधन की किस्त पर छूट नहीं मिलती। हमारे कैलकुलेटर की amortization schedule से अपना सालाना ब्याज निकालें और ITR में सही दर्ज करें।
टर्म लोन की अवधि आमतौर पर 7 साल (84 महीने) तक होती है। वर्किंग कैपिटल लोन 12 महीने के लिए होता है और हर साल नवीनीकरण होता है। LAP (Property Loan) पर 15-20 साल तक की अवधि मिल सकती है। मुद्रा लोन आमतौर पर 5 साल तक के लिए होते हैं। हमारा कैलकुलेटर 240 महीने तक सपोर्ट करता है।
प्रोसेसिंग फीस एक बार कटने वाला administrative charge है जो बैंक लोन देते समय काटता है। यह आमतौर पर लोन राशि का 0.5% से 3% होती है। मसलन, ₹25 लाख के लोन पर 2% फीस मतलब ₹50,000 — जो मिलने से पहले ही कट जाती है। लेकिन EMI पूरे ₹25 लाख पर भरनी होती है। इससे असली ब्याज दर बताई गई दर से ज़्यादा हो जाती है। इसीलिए हमने यह फीस कैलकुलेटर में शामिल की है।
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